जिले के ग्राम कन्हैरिया की निवासी श्रीमती पवित्रा नागर ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। कभी घर के कामकाज और खेती में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण में सहयोग करने वाली श्रीमती पवित्रा नागर आज प्राकृतिक खेती एवं जैविक उत्पादों के माध्यम से प्रतिमाह करीब 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। वे अपनी सफलता के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त कर रही हैं।

श्रीमती पवित्रा नागर ने बताया कि वे आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और कृषि सखी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्हें कृषि सीआरपी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इसी दौरान आत्मा विभाग के अधिकारियों ने गांव में किसानों के साथ बैठक कर उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम होने, आय बढ़ने और स्वास्थ्य को लाभ मिलने की जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया।

उन्होंने अपने चार बीघा खेत में प्राकृतिक खेती शुरू की। इसके अंतर्गत सब्जियों, लहसुन और फूलों का उत्पादन किया, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई। उनके कार्य और प्रयासों को देखते हुए उन्हें बीआरसी सेंटर का कार्य भी सौंपा गया। इसके लिए शासन की ओर से प्रथम किश्त के रूप में 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि से उन्होंने अपने यहां बायो यूनिट स्थापित की।

इस बायो यूनिट के माध्यम से वे घन जीवामृत, जीवामृत सहित 10 प्रकार की जैविक दवाइयां तैयार कर किसानों को उपलब्ध करा रही हैं। इससे उन्हें आय का एक नया स्रोत मिला है और उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है। आज वे खेती के साथ-साथ जैविक उत्पाद तैयार कर अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य और उपलब्धियों को देखते हुए ‘बलराम कृषि महोत्सव-2026’ एवं जिला स्तरीय किसान मेले में उन्हें सम्मानित किया गया।

श्रीमती पवित्रा नागर अपनी सफलता का श्रेय आजीविका मिशन, कृषि विभाग के मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं को देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।