पांढुर्णा जिले के ग्राम सावरगांव निवासी श्री नवनीत गोपाल महेश्वरी के लिए पशुपालन कोई नया काम नहीं था। परिवार में पहले से ही दुग्ध उत्पादन की परंपरा रही, लेकिन उन्नत नस्ल के पशुओं के अभाव और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन नहीं किए जाने के कारण दुग्ध उत्पादन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसे में उन्होंने पशुपालन को नए तरीके से करने का संकल्प लिया और विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया।
वर्ष 2017-18 में श्री महेश्वरी को एक साहीवाल नंदी नाटा प्रदाय किया गया। इसके बाद वर्ष 2021 से पशुपालन केसीसी योजना से भी वे जुड़े और वर्ष 2025 तक योजना का लाभ लेते रहे। योजना के अंतर्गत उन्हें 90 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध हुआ। इस सहयोग ने उनके डेयरी व्यवसाय को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 2021 से श्री महेश्वरी ने संकर गाय एवं भैंस के साथ साहीवाल नंदी से प्राप्त पशुओं को शामिल कर डेयरी फार्म को व्यवस्थित रूप देना शुरू किया। उन्होंने समझा कि केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, पोषण और नस्ल सुधार पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में फार्म प्रबंधन में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया।
उन्होंने पशुओं का नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण कराया। बीमार पशुओं का समय पर उपचार कराया तथा प्राकृतिक गर्भाधान के स्थान पर कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग किया। इससे पशुओं की प्रजनन दर और नस्ल में सुधार हुआ। पशुओं के बेहतर पोषण के लिए आयु के अनुसार संतुलित आहार देना शुरू किया गया। हरा चारा, भूसा, सुदाना और मिनरल मिक्सचर को पशु आहार में शामिल किया गया।
हरे चारे की उपलब्धता के लिए फार्म में ही नेपियर घास और अन्य चारा फसलों का उत्पादन भी किया जाने लगा। धीरे-धीरे इन प्रयासों का असर दिखाई देने लगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई और दूध की गुणवत्ता बेहतर हुई। वर्तमान में श्री महेश्वरी के फार्म से प्रतिदिन लगभग 180 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
उत्पादित दूध को 50 रुपये प्रति लीटर की दर से पांढुर्णा की डेयरी में विक्रय किया जा रहा है। इससे परिवार की आमदनी में वृद्धि हुई और पशुपालन आय का एक मजबूत स्रोत बन गया।
श्री महेश्वरी ने फार्म में कृत्रिम गर्भाधान के साथ विशेष रूप से sexed sorted semen का उपयोग करते हुए उन्नत नस्ल का ( replacement herd ) प्रतिस्थापन पशु-झुंड " या " नया पशुधन समूह तैयार किया। इससे नए पशुओं की खरीद पर होने वाली पूंजीगत लागत को कम करने में मदद मिली। आज उनका डेयरी फार्म आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन का उदाहरण बन रहा है।
श्री नवनीत गोपाल महेश्वरी की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी मेहनत और सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य पशुपालक, विशेषकर महिलाएं भी छोटे स्तर पर पशुपालन से जुड़ने लगी हैं। पशु चिकित्सा अधिकारियों के मार्गदर्शन में वे पशुपालन को आय के मुख्य स्रोत के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
श्री नवनीत गोपाल महेश्वरी की यह सफलता की कहानी बताती है कि मेहनत, विभागीय मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धति का समन्वय किया जाए तो पशुपालन केवल पारंपरिक गतिविधि नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।


