ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन द्वारा संचालित स्व-सहायता समूह महिलाओं के लिए आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रहे हैं। ग्राम सहदौरा की श्रीमती रेखा केवट की कहानी भी इसी बदलाव की मिसाल है। कक्षा 12 तक शिक्षा प्राप्त रेखा पिछले 10-12 वर्षों से सिलाई-कढ़ाई का कार्य कर रही हैं। उन्हें शासन द्वारा संचालित स्व-सहायता समूहों के संबंध में जानकारी मिली, जिसके बाद वे पिताम्बरा स्व सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद प्राप्त मार्गदर्शन एवं आर्थिक सहायता के माध्यम से उन्होंने अपने सिलाई-कढ़ाई के कार्य को आगे बढ़ाया। रेखा विभिन्न प्रकार के कपड़े एवं सिलाई-कढ़ाई से संबंधित वस्तुएं तैयार करती हैं और उन्हें बेचकर आय अर्जित कर रही हैं। अपने हुनर को रोजगार में बदलकर वे न केवल परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग कर रही हैं, बल्कि अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। रेखा बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर और आत्मविश्वास मिला। उनके लिए सिलाई-कढ़ाई अब केवल हुनर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गई है। रेखा स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को मिल रहे सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि समूहों के माध्यम से महिलाओं को संबल मिल रहा है। इससे महिलाएं अपने घर से ही रोजगार शुरू कर आर्थिक रूप से आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। रेखा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि हुनर, अवसर और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकती हैं। सुश्री निहारिका मीना सहायक संचालक जनसम्पर्क दतिया
सफलता की कहानी
सिलाई-कढ़ाई के हुनर से रेखा बनी आत्मनिर्भर, समूह से जुड़कर बढ़ाया रोजगार
- पढ़ने का समय
- 3 मिनट
- तारीख
- 7 अक्टूबर 2026
- जगह
- दतिया


