धातु की खोखली नलियाँ, अलग-अलग लंबाइयाँ और उन पर प्रहार से निकलते स्वर। मैहर बैंड के नल-तरंग को समझने की शुरुआत इसी बनावट से होती है। मध्यप्रदेश पर्यटन का ब्रोशर इस वाद्य को बंदूक की नलियों से बने प्रयोग के रूप में दर्ज करता है। संगीत के लिए उपलब्ध सामग्री से नया उपकरण गढ़ना इस वाद्य-वृंद की खास पहचान है।

इसके केंद्र में उस्ताद अलाउद्दीन खान थे। मैहर जिला प्रशासन उन्हें सरोद वादक, कई वाद्यों के जानकार और मैहर घराने की नींव रखने वाला गुरु बताता है। रविशंकर और अली अकबर खान उनके चर्चित शिष्यों में थे। महाराज बृजनाथ सिंह उन्हें बीसवीं सदी के आरंभ में मैहर लाए। यहीं बना ‘मैहर वाद्य-वृंद’ आगे मैहर बैंड के नाम से जाना गया।

अलग वाद्य, एक साथ की धुन

वाद्य-वृंद में कई उपकरण अपनी अलग आवाज रखते हुए एक समूह का हिस्सा बनते हैं। संस्कृति विभाग के विवरण में सितार, सरोद, इसराज, वायलिन, चेलो, सितार-बैंजो, हारमोनियम और तबले का मेल बताया गया है। नल-तरंग उस समूह में स्वरबद्ध धातु की नलियों की आवाज जोड़ता है।

मैहर की यह धुन शहर से बाहर के मंचों तक भी पहुँची है। पर्यटन मंत्रालय की 28 जनवरी 2019 की सूचना में दिल्ली के लाल किले पर हुए भारत पर्व में मध्यप्रदेश के कलाकारों द्वारा मैहर बैंड की प्रस्तुति दर्ज है। अलग-अलग प्रदेशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच यह वाद्य-वृंद मध्यप्रदेश का एक संगीत-रूप लेकर पहुँचा।

राष्ट्रीय सूची और नई पीढ़ी की तालीम

मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग की 27 जून 2026 की सूचना में मैहर बैंड को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई। यह भारत की राष्ट्रीय सूची की पहचान है, UNESCO की अंतरराष्ट्रीय सूची में दर्ज होने का अर्थ नहीं।

उसी जून की सूचना में शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर के माध्यम से गुरुकुल स्थापित किए जाने का काम भी बताया गया। उद्देश्य युवा कलाकारों को बैंड के संगीत, रागों और गुरु-शिष्य परंपरा की तालीम देना है। सूचना में प्रवेश या कक्षाएँ शुरू होने की निश्चित तारीख नहीं दी गई।

मैहर में अलाउद्दीन खान का निवास मदिना भवन या शांति कुटीर नाम से जाना जाता है। निवास उनकी स्मृति से जोड़ता है और बैंड उनके सामूहिक संगीत-प्रयोग से। इस परंपरा की कहानी में गुरु की तालीम के साथ सामग्री, वाद्य की बनावट और साथ बजाने का हुनर भी शामिल है।

मुख्य बातें

  • नल-तरंग में अलग लंबाई की धातु की नलियों से अलग स्वर निकलते हैं।
  • MP Tourism का ब्रोशर इसमें बंदूक की नलियों के उपयोग का विवरण देता है।
  • 27 जून 2026 की सरकारी सूचना में मैहर बैंड को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने की जानकारी दी गई।

स्रोत और संदर्भ

  1. District Maihar, Government of Madhya Pradesh · Culture & Heritage — Maihar (Music renowned City) (पृष्ठ संशोधित: 2026-09-10) ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. Madhya Pradesh State Tourism Development Corporation · Maihar Destination Brochure ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. पर्यटन मंत्रालय / PIB · Colourful celebrations become a star attraction at Bharat Parv 2019 ↗28 जनवरी 2019
  4. मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग / MPInfo · मैहर बैंड भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में सम्मिलित ↗27 जून 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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