दूर-दूर बने 12 किले भी एक विश्व धरोहर हो सकते हैं। 11 जुलाई 2025 को विश्व धरोहर समिति ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ को इसी तरह दर्ज किया। UNESCO इसे serial property कहता है: कई स्थान, जिनका साझा इतिहास और काम उन्हें एक समूह बनाता है। इनमें 11 किले महाराष्ट्र में हैं और जिंजी तमिलनाडु में है। पहाड़, पठार, जंगल और समुद्र के अनुसार उनकी बनावट बदलती है। इन जगहों को साथ देखना मराठा रक्षा-योजना का बड़ा नक्शा खोलता है।
पांच भूगोल, अलग किले
सल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़, राजगढ़ और जिंजी पहाड़ी किले हैं। प्रतापगढ़ घने वन से जुड़ा पहाड़ी-जंगल किला, पन्हाला पहाड़ी-पठारी और विजयदुर्ग तटीय किला है। खांदेरी, सुवर्णदुर्ग और सिंधुदुर्ग समुद्र से घिरे द्वीपीय किले हैं। सह्याद्रि के दर्रों से कोंकण तट और पूर्वी घाट तक इस फैलाव ने व्यापार मार्ग, बंदरगाह, चढ़ाई और दूर की निगरानी को एक नेटवर्क में जोड़ा। UNESCO ने इसी विविधता में भू-आकृति और सैन्य योजना का संयुक्त वास्तु महत्व पहचाना।
किस आधार पर विश्व धरोहर
समिति ने मानदंड (iv) और (vi) पर नामांकन स्वीकार किया। पहला सैन्य वास्तुकला, योजना, तकनीक और अलग भूगोल के अनुसार बदलते प्रकारों से जुड़ा है। दूसरा स्वराज्य और सांस्कृतिक दृढ़ता जैसे जीवित विचारों से किलों के संबंध को मानता है। UNESCO सूची में संपत्ति का मूल क्षेत्र 1,577.63 हेक्टेयर और बफर क्षेत्र 96,500.43 हेक्टेयर दर्ज है। आठ हिस्से ASI के संरक्षण में हैं; सल्हेर, राजगढ़, खांदेरी और प्रतापगढ़ महाराष्ट्र के पुरातत्व निदेशालय के अधीन हैं।
संरक्षण में आसपास का भू-दृश्य भी
समिति ने छोटे सहायक किलों वाले बफर क्षेत्रों को मजबूत सुरक्षा देने, आसपास की बड़ी परियोजनाओं का धरोहर पर प्रभाव का आकलन करने, दस्तावेजों को साझा भौगोलिक सूचना प्रणाली में जोड़ने और नियमित रखरखाव की सिफारिश की। भारत से 1 दिसंबर 2026 तक इन बिंदुओं पर प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई है। इसलिए संरक्षण में किलों के आसपास का भू-दृश्य भी शामिल है। पहाड़ काटने, तट बदलने या दृश्य-रेखा रोकने वाली परियोजना किसी अकेली दीवार से दूर होकर भी पूरे नेटवर्क का अर्थ कमजोर कर सकती है।
मुख्य बातें
- 11 किले महाराष्ट्र और जिंजी किला तमिलनाडु में है; सभी को एक serial property के रूप में दर्ज किया गया।
- छह पहाड़ी, एक पहाड़ी-जंगल, एक पहाड़ी-पठारी, एक तटीय और तीन द्वीपीय किले भूगोल के मुताबिक अलग रक्षा-रूप दिखाते हैं।
- UNESCO निर्णय ने नियमित रखरखाव, प्रभाव आकलन, GIS दस्तावेजीकरण और बफर क्षेत्र की मजबूत सुरक्षा की सिफारिश की।
स्रोत और संदर्भ
- UNESCO World Heritage Centre · Maratha Military Landscapes of India ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- UNESCO World Heritage Committee · Decision 47 COM 8B.16 — Maratha Military Landscapes of India ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- संस्कृति मंत्रालय / PIB · Maratha Military Landscapes of India Inscribed in the UNESCO World Heritage List as India’s 44th Entry ↗11 जुलाई 2025
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



