श्योपुर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत संचालित स्वसहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक बदलाव का माध्यम बन रहे हैं। इनके माध्यम से महिलाएं अपने आर्थिक उत्थान की नई इबारत लिख रहीं है। कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत श्री कार्तिकेय जायसवाल के निर्देशन में श्योपुर जिले में एनआरएलएम अंतर्गत 5 हजार 816 स्वसहायता समूह संचालित है, जिनसे लगभग 58 हजार महिलाएं जुडी हुई है, जिनमें से 19 हजार महिलाएं ऐसी है, जो आजीविकामूलक गतिविधियों को अपनाकर लखपति दीदी क्लब में शामिल हो गई है।

ऐसी ही एक कहानी है, श्यामपुर की मनीषा की, जिसने अपने इरादों और हौसलो से अपनी दुनिया बदल दी है। गांव के एक मोहल्ले में झोपडी बनाकर रहने वाली श्रीमती मनीषा रावत का जीवन मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तीन बच्चों के परिवार के पालन-पोषण में पति की मजदूरी भी पूरी नही पड रही थी, ऐसे में जब कोई बच्चा बीमार हो जाता तो, आर्थिक संकट खडा हो जाता था। बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था भी बमुश्किल हो पाती थी। परिवार की इस स्थिति को देखकर आमगृहणी के रूप में मनीषा चुपचाप आसू बहाती रहती थी और मन ही मन इस कठिन आर्थिक संकट से निकलने के बारे में सोचती रहती थी।

मनीषा बताती है कि उसकी हालत किसी से छिपी न थी, इसलिए पडोस में रहने वाली एक दीदी ने उसे स्वसहायता समूह से जुडने का प्रस्ताव दिया और वह शशि स्वसहायता समूह में सदस्य बनकर उसकी बैठको में भाग लेने लगी, उसने इरादा किया था कि सबसे पहले बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था करनी है, तो उसने समूह की बैठक में यह बात बताई और सभी साथी महिलाओं ने उसे गाय खरीदने के लिए समूह से छोटा सा लोन दे दिया। मनीषा ने एक गाय खरीदी और हरा चारा आदि काटकर गाय को खिलाती तथा गाय की खूब सेवा करती, जिससे उसे प्रतिदिन दो लीटर दूध मिलने लगा। इस दूध में से मनीषा अपने बच्चों को दूध पीने के लिए देती और एक किलो दूध गांव में ही 50 रूपये लीटर के हिसाब से बेच देती, जिससे उसे आमदनी भी होने लगी। गाय की सेवा करने के साथ ही वह इसमें पारंगत हो गई और गौसेवा का भाव भी उसमें पूर्व से ही था, इसलिए उसने समूह के सामने यह प्रस्ताव रखा कि उसे पंचायत के माध्यम से गांव की गौशाला संचालन का कार्य सौपा जाये तो वह बेहतर तरीके से गौशाला को चलायेगी। इस प्रस्ताव पर एनआरएलएम के अधिकारियों द्वारा पंचायत के साथ गौशाला संचालन का अनुबंध कराया गया, चूकि मनीषा एक गोसेवक की भावना से कार्य रही थी और मेहनती भी खूब थी, इसलिए गौशाला का संचालन बेहतर तरीके से होने लगा, आज मनीषा गौशाला की लगभग 100 गायों की देखभाल करती है और इन गायों से औसतन 50 लीटर दूध प्रतिदिन मिल रहा है, जिसे विक्रय कर गौशाला की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही स्वयं का परिवार भी खुशहाल तरीके से चला रही है। बच्चों के लिए दूध की भी अब कोई कमी नही रही, पति जो दूसरो के यहां मजदूरी करता था, अब गौशाला के काम में ही हाथ बटाता है। समूह के माध्यम से 4 लाख रूपये सीसीएल ऋण की प्रतिमाह 10 हजार रूपये किस्त भी उसके द्वारा नियमित रूप से प्रदान की जा रही है। इस प्रकार मनीषा ने एक गाय पालने के साथ ही आज 100 गायों की गौशाला का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है।